
सारंगढ़। प्रदेश में खरीफ फसल गिरदावरी 26-27 को ले प्रशासनिक घमासान तेज हो गया है। तकनीकी खामियों से भरे ‘पीवी एप’ (भौतिक सत्यापन एप) से गिरदावरी करने से पहले पटवारियों और फिर राजस्व निरीक्षकों के हाथ खींचने के बाद, अब इसका जिम्मा ग्रा. कृषि विस्तार अधिकारियों (आरएईओ) और कृषि विकास अधिकारियों (एडीओ) पर थोपने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन के इस फरमान के खिलाफ कृषि अमले में भारी आक्रोश है। कृषि स्नातक शा. कृषि अधिकारी संघ व आरएईओ संघ ने दो टूक कहा है कि फसल गिरदावरी, सीमांकन, बटांकन और राजस्व अभिलेखों का संधारण पूरी तरह राजस्व विभाग का मूल कार्य है। कृषि विस्तार अधिकारी को न तो नक्शा- बटांकन का तकनीकी ज्ञान है और न ही वे खसरों की वास्तविक सीमाओं से वाकिफ होते हैं। ऐसे में पटवारी और आरआई के पीछे हटने के बाद कृषि अधिकारियों को आगे धकेलना अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है।
संघ का कहना है कि – भुइयां का नक्शा लगभग 3 वर्ष पुराना है। जमीन पर विभाजित लाखों खसरों का बटांकन नक्शे में दर्ज ही नहीं है। ऐसे में बिना सीमांकन और किसान की मौजूदगी के मौके पर खसरा पहचानना संभव नहीं है। वर्तमान में खेतों में धान की फसल खड़ी है और भारी जलभराव है। पीवी एप की बाध्यता है कि खेत के चारों कोनों में जाकर जीपीएस लोकेशन के साथ लाइव फोटो लेनी होगी। पानी और कीचड़ से लबालब खेतों के कोनों तक पहुंचना जान जोखिम में डालने जैसा है। कृषि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह अव्यावहारिक आदेश वापस नहीं लिया जाता और कृषि अमले को इस राजस्व कार्य से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक वे पीवी एप से गिरदावरी का कार्य नहीं करेंगे। संघ ने मांग की है कि कृषि विस्तार अधिकारियों को उनके मूल दायित्वों जैसे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज-खाद उपलब्धता और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन तक ही सीमित रखा जाए।



