छत्तीसगढ़सारंगढ़-बिलाईगढ़

जलप्रलय की कगार पर महानदी..सड़कों पर सैलाब, गिधौरी से चंद्रपुर तक हाहाकार..

पोरथ शिव मंदिर जलमग्न, डाकघर और राशन गोदाम में घुसी बाढ़..

सारंगढ़-रायगढ़ हाईवे ठप, लात नाला पुल डूबा..

धान की फसलें तबाह, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न…

सारंगढ़-बिलाईगढ़:
छत्तीसगढ़ में बीते 72 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और ऊपरी बांधों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी ने महानदी घाटी में कोहराम मचा दिया है। गंगरेल जलाशय के साथ-साथ हीराकुंड बांध के 24 गेट एक साथ खोले जाने के बाद महानदी और मांड नदी पूरी तरह उफान पर आ गई हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़, सरिया, चंद्रपुर और पुसौर क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से स्थिति बेकाबू होती जा रही है। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है और सड़कें दरिया में तब्दील हो गई हैं।

बाढ़ के पानी ने क्षेत्र की लाइफलाइन माने जाने वाले प्रमुख मार्गों की रफ्तार रोक दी है।

टीमरलगा और मांड नदी के पास डभरा तिराहे पर कई फीट पानी भर जाने के कारण यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है, जिससे दोनों ओर ट्रकों और बसों की लंबी कतारें लग गई हैं।
चंद्रपुर लात नाला पुल: लात नाला पुल के ऊपर से पानी की तेज धारा बहने से प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर मार्ग बंद कर दिया है।

गिधौरी में मुख्य बाजार और मुख्य सड़कों पर घुटनों से ऊपर पानी बह रहा है, जिससे दुकानें बंद हैं और स्थानीय लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

जलमग्न हुआ ऐतिहासिक पोरथ शिव मंदिर-

महानदी के विकराल जलस्तर का खौफनाक नजारा सरिया तहसील में देखने को मिला, जहां सदियों पुराना ऐतिहासिक पोरथ शिव मंदिर पूरी तरह पानी में समा गया है। वहीं चंद्रपुर महानदी पुल के बीच स्थित मां नाथलदाई मंदिर के चारों ओर पानी का तेज भंवर बन चुका है। नदी किनारे बसे नदीगांव में बाढ़ का पानी रिहाइशी इलाकों के साथ-साथ शासकीय डाकघर और पीडीएस राशन गोदाम में घुस गया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए राशन सामग्री को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि डाकघर को बंद करना पड़ा है।

सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबी –

महानदी के कछार में बसे विजयपुर, बुदबुदा, लिप्ती, सुरसी, सूरजगढ़, रानीडीह, कोर्रा, पुसौर के नवापाली, तेलीपाली और हल्दी समेत दर्जनों गांवों के खेतों में कई फीट पानी भर चुका है। लहलहाती धान की फसलें डूब जाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। यदि अगले 24 से 48 घंटे तक पानी का ठहराव बना रहा, तो धान की पौध पूरी तरह सड़ जाएगी और अन्नदाताओं को भारी आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ेगा।

प्रशासन अलर्ट मोड पर, 24 घंटे निगरानी जारी-

लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला व स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। आपदा राहत दलों को सतर्क कर दिया गया है और तटीय बस्तियों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। अधिकारियों ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति उफनते रपटों, पुलों या तेज बहाव वाले पानी को पार करने का जोखिम न उठाए।

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