
सारंगढ़। वरिष्ठ भाजपा नेता अरविंद हरिप्रिया ने बताया कि भाजपा के नवनियुक्त पदाधिकारी बैठक में पहला प्रस्ताव भारत के गौरव एवं सम्मान वंदे मातरम महामंत्र के सम्मान में पारित हुआ है । पिछले कुछ महीनों में वंदे मातरम को लेकर ऐतिहासिक फैसले हुए हैं । उन्होंने कहा कि यह वर्ष वंदे मातरम की 150 वीं साल गिरह के रूप में मनाया जा रहा है। हिंदुस्तान के कोने – कोने में वंदे मातरम के प्रति सम्मान भाव, भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिल रहा है। भारत के इतिहास में पहली बार प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के नेतृत्व में वंदे मातरम के सभी 6 छंद का गायन लाल किले के परिसर में हुआ।
15 अगस्त 2026 को भारत के इतिहास में पहली बार पूरे वंदे मातरम का गायन हुआ । कांग्रेस अपनी तुष्टिकरण की नीति के चलते वंदे मातरम का विरोध कर रही है। देश की जनता, नौजवान इसे किसी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे । हमारा पहचान हमारा वंदे मातरम ही है, जो हमें यह याद दिलाता है कि – भारत किसी एक धर्म, भाषा, जाति या समुदाय का नाम नहीं है। यह उन तमाम लोगों का साझा देश है जिनकी अलग – अलग पहचाने हैं, तो हमारी पहचानें अनेक हो सकती है लेकिन हमारा हिंदुस्तानी होना उन सबको साथ लेकर चलने की पहचान है।









