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सारंगढ़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव: सेवानिवृत्त प्रधान पाठक मणिप्रभा त्रिपाठी को मिला सावित्री बाई फुले वैश्विक सुपर 30+ पुरस्कार

सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के वार्ड क्रमांक 05, बाबा कुटी, सारंगढ़ निवासी सेवानिवृत्त प्रधान पाठक एवं पर्यावरण प्रेमी श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी को शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण संरक्षण एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए “सावित्री बाई फुले वैश्विक सुपर 30+ शिक्षा उत्कृष्टता एवं प्रेरणा पुरस्कार-2026” से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान गोपाल किरण समाज सेवी संस्था (GKSSS), ग्वालियर द्वारा श्रीराम प्रबंध विश्वविद्यालय, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, सोनीपत तथा हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र के संयुक्त सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं हितधारक परामर्श कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।

हैदराबाद में हुआ सम्मान समारोह

सम्मान समारोह का आयोजन 18 सितंबर 2026 को सभा कक्ष, सामाजिक विज्ञान संकाय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद, तेलंगाना में किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, शोध, साहित्य, सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, संस्कृति तथा जन-जागरूकता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।

इस वैश्विक सम्मान के लिए देश-विदेश से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 30 से अधिक प्रतिभाशाली महिलाओं का चयन किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ की श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी का चयन क्षेत्र के लिए गौरव का विषय रहा।

सेवा और समर्पण की प्रेरणादायी यात्रा

श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी की उपलब्धियों में शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का विशेष स्थान है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सामाजिक सरोकारों से स्वयं को जोड़े रखा और अपने व्यक्तिगत संसाधनों का उपयोग जनहित के कार्यों में किया।

पर्यावरण संरक्षण:
उन्होंने अपनी पेंशन की राशि से आशा निकेतन वृद्धाश्रम, सारंगढ़ के बंजर पड़े विशाल परिसर में 50 से अधिक फलदार, छायादार, ऑक्सीजन प्रदान करने वाले तथा शोभादार पौधों का रोपण किया। उनके प्रयासों से यह परिसर एक सुंदर पुष्प एवं हरित वाटिका के रूप में विकसित हुआ।

शिक्षा में नवाचार:
प्रधान पाठक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने लगभग 15 लाख रुपये की निजी राशि खर्च कर शासकीय विद्यालय की बंजर भूमि को पोषण वाटिका में विकसित किया। इसमें विभिन्न प्रकार की सब्जियां, फल एवं औषधीय पौधे उगाए गए। उनके अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति, पोषण और स्वावलंबन से जोड़ना था। पिछले लगभग सात वर्षों से इस वाटिका में उत्पादित ताजी एवं पोषक फल-सब्जियों का उपयोग बच्चों के मध्यान्ह भोजन में किया जाता रहा है।

गरीब एवं वंचित विद्यार्थियों के लिए सहयोग:
श्रीमती त्रिपाठी ने आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा में निरंतर सहयोग किया। उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्य कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके दो शिष्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं सार्वजनिक सेवा संबंधी पदों पर कार्यरत हैं।

शोध एवं साहित्य सृजन:
वे पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय साक्षरता, सामाजिक विकास एवं महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर अध्ययन, शोध और लेखन से भी जुड़ी रही हैं। शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर सामाजिक चेतना और व्यवहारिक जीवन से जोड़ना उनके कार्य की प्रमुख विशेषता रही है।

प्रशस्ति पत्र में योगदान का उल्लेख

सम्मान के अवसर पर जारी प्रशस्ति पत्र में उनकी यात्रा को ज्ञान, दृढ़ संकल्प, सृजनशीलता, साहस और उद्देश्यपूर्ण कार्य से जुड़ी प्रेरणादायी यात्रा के रूप में रेखांकित किया गया। इसमें शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, शोध, लेखन, पर्यावरण जागरूकता, सामाजिक विकास, वित्तीय शिक्षा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख किया गया।

सम्मान प्रमाण पत्र पर श्रीप्रकाश सिंह निमराजे, अध्यक्ष, गोपाल किरण समाज सेवी संस्था; प्रोफेसर अजय के. साहू, विभागाध्यक्ष, भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र, हैदराबाद विश्वविद्यालय; प्रोफेसर गजेंद्र पाठक, वरिष्ठ आचार्य, हिंदी विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय; तथा डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ, सह-प्रधान अन्वेषक, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद परियोजना, श्रीराम प्रबंध विश्वविद्यालय के हस्ताक्षर रहे।

“उम्र केवल एक संख्या है”

सम्मान प्राप्त करने के बाद श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी ने कहा, “उम्र केवल एक संख्या है। यदि मन में जज़्बा और संकल्प हो तो मनुष्य पत्थर में भी रास्ता बना सकता है। परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, हमें सदैव ऊर्जावान और कर्मठ रहना चाहिए।”

उनका यह सम्मान इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी व्यक्ति अपने अनुभव, संसाधन और ऊर्जा का उपयोग समाज, शिक्षा और पर्यावरण के हित में कर सकता है।

श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी की इस उपलब्धि से सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंचल के शिक्षा जगत, सामाजिक क्षेत्र और पर्यावरण से जुड़े लोगों में प्रसन्नता है। स्थानीय स्तर पर शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से एक व्यापक पहचान मिली है।

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