स्वच्छता की बैठक, सवालों से दूरी और सच से परहेज सारंगढ़ को मॉडल शहर बनाने की बातें, मगर ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर प्रशासन

सारंगढ़–बिलाईगढ़- जिला मुख्यालय सारंगढ़ को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के नाम पर कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे और एसपी आँजनेय वार्ष्णेय की मौजूदगी में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में एक अहम बैठक तो हुई, लेकिन यह बैठक सवालों से बचने, आलोचनात्मक आवाज़ों को दूर रखने और पहले से तय स्क्रिप्ट पढ़ने तक ही सीमित नजर आई।बैठक में शहर की सफाई, सौंदर्यीकरण और अतिक्रमण हटाने की बड़ी-बड़ी बातें जरूर की गईं, लेकिन अवैध कब्जों को संरक्षण देने वाले वही चेहरे भी बैठक में आमंत्रित थे, जिनके कारण शहर बदहाली झेल रहा है। हैरानी की बात यह रही कि स्टे के बावजूद निर्माण करा रहे व्यापारियों को तो बुलाया गया, मगर पूरे समय पत्रकारों को बैठक से दूरी बनाकर रखा गया।
कलेक्टर द्वारा अतिक्रमण पर कठोर रुख की बात की गई, लेकिन यही सख्ती वर्षों से केवल भाषणों तक सीमित है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड और रहवासी इलाकों में खुलेआम अतिक्रमण और कबाड़ का करोबार आज भी प्रशासन को चुनौती देता नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या यह बैठक केवल औपचारिकता निभाने और फाइलों में फोटो लगाने के लिए थी। बैठक में चेम्बर ऑफ कॉमर्स, वरिष्ठ नागरिकों और चुनिंदा लोगों से राय तो ली गई, लेकिन जिले के पत्रकारों के सवालों से कलेक्टर और प्रशासन पूरी तरह बचते नजर आए। यही नहीं, जिले में पत्रकारों का काम अब शायद सहायक जनसंपर्क अधिकारी देव राम यादव ही तय कर रहे हैं, जिससे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थिति यह है कि पुरानी खबरों को नया रूप देकर परोसा जा रहा है, जमीनी सच्चाई पर बात करने वालों को हाशिए पर धकेला जा रहा है और सवाल पूछने वालों को असुविधाजनक मान लिया गया है। ऐसे में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और आदर्श शहर की बातें खोखली घोषणाओं से ज्यादा कुछ नहीं लगतीं। वरिष्ठ पत्रकार भरत अग्रवाल द्वारा नगरपालिका की आय बढ़ाने को लेकर दिए गए सुझाव व्यावहारिक जरूर थे, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन इन सुझावों पर अमल करेगा या यह भी बाकी बैठकों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा। जब तक अतिक्रमण पर वास्तविक कार्रवाई, पारदर्शिता और सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं दिखाई जाती, तब तक सारंगढ़ को मॉडल शहर बनाने के दावे केवल पोस्टर और प्रेस नोट तक ही सीमित रहेंगे।सच यह है कि शहर को सुंदर नहीं, प्रशासन को जवाबदेह बनाने की जरूरत है।














