
सारंगढ़ । अजा जिलाध्यक्ष एवं जिपं सदस्य बिनोद भारद्वाज ने प्रेस को बताया कि – सर्वोच्च न्यायालय के प्रांगण में एक अधिवक्ता ने देश के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई दूसरे दलित और पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश (CJI) हैं , पर जूता फेंकने जैसा शर्मनाक और जातिगत घृणा से प्रेरित कृत्य किया गया । यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे अजा समुदाय की गरिमा और हमारे संविधान के मूल मूल्यों पर आघात है । भारत की स्वतंत्रता के 78 वर्ष बाद भी यदि देश के दलित मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय में सुरक्षित नहीं हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है देश के सबसे सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले एक सामान्य दलित पुरुष या महिला की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी ? यह घटना समाज में व्याप्त गहरे जातिगत पूर्वाग्रह को उजागर करती है, जिसे एक जुट हो कड़ा प्रतिरोध किया जाना चाहिए ।
प्रदेश कांकमेटी के निर्देश पर जिला मुख्यालय के समक्ष एक सशक्त एवं शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा । इस विरोध के दौरान भारत के राष्ट्रपति को जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा जाना है, जिसमें यह मांग रखी जाएँ । उस अधिवक्ता के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसने दलित सीजेआई पर हमला किया, संवैधानिक पद की अवमानना और दलित न्यायाधीश के प्रति घृणा फैलाने वाले इस कृत्य हेतू गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (UAPA) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाए। भारत सरकार द्वारा यह स्पष्ट संदेश दिया जाए कि – किसी भी संस्था विशेष कर न्यायपालिका में, जाति गत उत्पीड़न या अपमान के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी । यह विरोध प्रदर्शन एस.सी. विभाग के पदाधिकारियों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी में जल्द ही किया जाए । यह जानकारी बिनोद भारद्वाज ने दी है ।














