
सारंगढ़ :- सारंगढ़ में पितृ विसर्जन के अवसर पर हिंदू धर्म की आस्था और परंपरा देखने को मिली। नगर के खाड़ा बंद तालाब में सारंगढ़ के विद्वान पंडित अशोक शर्मा के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पितृ पक्ष के समापन पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए। हिंदू धर्म में पितृ विसर्जन, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है, का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृ पक्ष का समापन होता है। इस दिन उन पूर्वजों का भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश नहीं हो पाया हो। श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। इस पितृमास के आखरी दिन सारंगढ़ के खाड़ा बंद तालाब में भी पितृ विसर्जन के अवसर पर लोगों ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की।



