
सारंगढ़ – सारंगढ़ अंचल के ग्राम बालपुर मे 15 जुलाई से 22 जुलाई तक , श्रीमद भागवत कथा का आयोजन हेमंत दुबे परिवार द्वारा किया गया कथा वाचक ग्राम रेड़ा निवासी पंडित विजयानंद शर्मा जी थे।कथा के अंतिम दिवस पंडित विजयानंद शर्मा जी ने भागलत कथा में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया उन्होंने कहा कि जब किसी संत,महात्मा,भक्त, साधु,ऋषि,सतीनारी से जो सत्य संकल्प,सत्यनिष्ठ,एक आदर्श एवं मर्यादित जीवन जीते हैं उनके द्वारा कोई गलती हो जाती है तो दुनिया इस पर थूकती है, दोषारोपण लगाती है, यह महान दोष है, इससे गलती करनेवाला तो पाप से मुक्त हो जाता है और कहनेवाले पाप के भागी होते है ,सत्यवती के गर्भ से व्यास जी की उतपत्ति।
जगत में मनुष्य का देह मिलना बड़ा कठिन है दुर्लभ है, मेरी समझ मे उससे भी ज्यादा दुर्लभ है मनुष्य होकर ब्राह्मण का कुल प्राप्त होना।
2 सप्तऋषियो का कारण क्रोध तीन जन्म तक राक्षस होने का श्राप दे देना।
3दुर्योधन का कपड़ा लपेटना,
4 राजा परीक्षित द्वारा मरा हुआ सांप की माला पहनाना।
5युधिस्ठिर का झूठ नरो वा
6 सती जी का राम की परीक्षा
7सीता जी द्वारा लक्ष्मण रेखा
8शांतनु जी द्वारा गंगा को दिया वचन तोड़ना।
9नारद जी का भगवान को श्राप
10ब्रह्मचारी भीष्म द्वारा 3 कन्या अपहरण कर लाना।
इसी प्रकार चंपत राय जी भी आजीवन संत की तरह जीवन जिये यदि गलती हो गयी तो क्षम्य है शास्त्रानुसार कोई दंड नही है प्रायश्चित्त ही केवल उपाय है।














