
सारंगढ़। कहते हैं कि अगर नेतृत्व करने वाले की नीयत साफ हो और उसमें कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो दम तोड़ती व्यवस्थाएं भी पुनर्जीवित हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही मिसाल पेश किया है जिला अस्पताल सारंगढ़ के सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल ने। उनके पदभार संभालते ही अस्पताल की कार्यशैली और व्यवस्था में ऐसा क्रांतिकारी बदलाव आया है, जिसने यह साबित कर दिया है कि ‘एक अकेला व्यक्ति अगर ठान ले, तो पूरी व्यवस्था का कायाकल्प कर सकता है।’
कुछ समय पहले तक जिस जिला अस्पताल को लोग केवल ‘रेफरल सेंटर’ के रूप में जानते थे, आज वही अस्पताल अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के कारण पूरे अंचल के लिए लाइफलाइन बन चुका है। डॉ. जायसवाल की दूरदर्शी सोच और कड़े अनुशासन का नतीजा है कि आज जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है।
करोड़ों की शासकीय संपत्ति की रक्षा-
अस्पताल के भीतर की एक बड़ी सच्चाई यह भी सामने आई है कि प्रयोगशाला सेवाएं एक निजी कंपनी (एचएलएल) को सौंपे जाने के बाद, पूर्व में उपयोग होने वाली कई बेहद महंगी आधुनिक मशीनें और उपकरण लावारिस और अनुपयोगी स्थिति में छोड़ दिए गए थे। करोड़ों रुपये के ये शासकीय उपकरण कबाड़ होने की कगार पर थे।
लेकिन डॉ. दीपक जायसवाल ने पदभार ग्रहण करते ही सबसे पहले इन बेशकीमती संसाधनों की सुध ली। उन्होंने त्वरित निर्णय लेते हुए इन सभी शासकीय उपकरणों का संरक्षण सुनिश्चित किया और नियमानुसार सुरक्षित भंडारण (ब्लड स्टोरेज यूनिट व अन्य विंग्स) की व्यवस्था कराई। उनकी इस सजगता ने न केवल शासकीय धन की बर्बादी रोकी, बल्कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति को सुरक्षित कर अस्पताल के संसाधन को मजबूत किया।
गंभीर बीमारियों का इलाज अब स्थानीय स्तर पर-
पहले जिन गंभीर बीमारियों के नाम सुनते ही मरीज और उनके परिजन सहम जाते थे और बिलासपुर या रायपुर भागने को मजबूर होते थे, उनका इलाज अब सारंगढ़ जिला अस्पताल में सुलभ हो चुका है। डॉ. जायसवाल के विशेष प्रयासों से अब अस्पताल में:
ब्रेन हेमरेज और पैरालिसिस (लकवा) जैसी आपातकालीन स्थितियां
हृदयाघात (हार्ट अटैक) के शुरुआती और क्रिटिकल मैनेजमेंट
सिकल सेल, टीबी और अन्य जटिल रोगों की जांच व उपचार
इन सभी गंभीर बीमारियों के लिए अब आधुनिक जांच मशीनें और विशेषज्ञ सुविधाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध हैं। समय पर इलाज मिलने से अब तक सैकड़ों मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।
साफ-सफाई और अनुशासन-
डॉ. जायसवाल केवल केबिन में बैठकर निर्देश देने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे खुद अस्पताल परिसर, वार्डों और आधुनिक लैब का सतत निरीक्षण करते हैं। यही वजह है कि आज अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वार्डों का प्रबंधन और मरीजों के बैठने व इलाज की सुविधाएं किसी बड़े निजी अस्पताल को टक्कर दे रही हैं। बेहतर माहौल और डॉक्टरों की समय पर मौजूदगी के कारण अब आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर कई गुना बढ़ गया है।
जनता की जुबानी: “डॉ. जायसवाल हमारे लिए मसीहा बनकर आए”
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों का साफ कहना है कि सारंगढ़ जिला अस्पताल का यह नया स्वरूप डॉ. दीपक जायसवाल के कुशल नेतृत्व और मरीज-केंद्रित कार्यशैली की ही देन है। क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि शासकीय सेवा में डॉ. जायसवाल जैसे कर्तव्यनिष्ठ और विजनरी अधिकारियों की मौजूदगी यह भरोसा दिलाती है कि सरकारी तंत्र भी जनता को सर्वोत्तम सुविधाएं दे सकता है।
सारंगढ़ जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का यह नया अध्याय आने वाले समय के लिए एक मिसाल बन चुका है, जहां एक व्यक्ति की कमान ने पूरे अस्पताल की तकदीर और तस्वीर बदल कर रख दी।













