छत्तीसगढ़सारंगढ़-बिलाईगढ़

टुण्डरी वन नाका में अवैध वसूली के आरोपों से सनसनी

सारंगढ़ । जिले के वन परिक्षेत्र बिलाईगढ़ अंतर्गत टुण्डरी वन नाका में पदस्थ प्रभारी जवाहरलाल कैवर्त्य (वनपाल) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वायरल वीडियो को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वन नाका से गुजरने वाले लकड़ी परिवहन वाहनों से कथित रूप से नियमों को नजर अंदाज कर अवैध वसूली की जा रही है। हालांकि , इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, मामले की जांच होना शेष है। यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गति विधियां और लगाए जा रहे आरोप सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह केवल एक कर्मचारी तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था, जवाबदेही और प्रशासनिक नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। वन विभाग का मूल दायित्व वन संपदा की सुरक्षा, अवैध कटाई पर रोक तथा अवैध परिवहन को नियंत्रित करना है। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों पर लगे इस प्रकार के आरोप स्वाभाविक रूप से जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि – क्षेत्र में लंबे समय से लकड़ी के अवैध परिवहन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। वायरल वीडियो के बाद लोगों के मन में यह सवाल और गहरा हो गया है कि वन नाका पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है तथा नियमों का पालन पारदर्शिता के साथ हो भी रहा है या नहीं। लोगों का मानना है कि – यदि किसी वाहन को नियमों के विपरीत तरीके से गुजरने दिया जाता है और उसके बदले धनराशि ली जाती है, तो इससे न केवल शासन को राजस्व की क्षति होती है, बल्कि वन संरक्षण कानूनों की भावना भी प्रभावित होती है। ऐसे मामलों से अवैध लकड़ी कारोबारियों के हौसले बढ़ सकते हैं और वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है।

वायरल वीडियो के बाद क्षेत्रवासियों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला प्रशासन और राज्य शासन से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठी है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी प्रकार का प्रभाव जांच को प्रभावित न कर सके। इस विषय में विशेषज्ञों का भी मानना है कि – सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो अधिकारी – कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना भी उतना ही आवश्यक है। क्या वायरल वीडियो की विभागीय जांच शुरू की जाएगी ?
क्या कथित अवैध वसूली के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी? क्या वन नाकों की कार्य प्रणाली का विशेष ऑडिट कराया जाएगा? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उक्त अधिकारी और कर्मचारी पर क्या कार्रवाई होगी ?

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