छत्तीसगढ़सारंगढ़-बिलाईगढ़

हिंदू सम्मेलन में 400 से अधिक लोग शामिल

सारंगढ़ । समाजसेवी सतीश यादव संयोजक के रूप में एवं कवि दिनेश दिव्य कार्य क्रम के अध्यक्ष सारंगढ़ नगर में 11 जनवरी रविवार को डॉ भीमराव अंबेडकर बस्ती क्र. 3 द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर में एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें 400 से अधिक हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया । सम्मेलन का मुख्य आकर्षण एक ही पंडाल के नीचे आयोजित सामाजिक समरसता महाभोज रहा एवं हिंदू देवी देवताओं के स्वरूप में आए हमारे बच्चों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया जिन्हें कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया एवं सारंगढ़ सम्मान का कार्यक्रम साथ में रखा गया , जिसमें सारंगढ़ के ऐसे लोग जिन्होंने सामाजिक क्षेत्र, सांस्कृतिक क्षेत्र ,समाज सेवा के क्षेत्र में एवं पढ़ाई के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं । उन सबको सम्मानित किया गया। हमारे विष्णु प्रपन्नाचार्य, राजस्थान से आए हमारे गौ सेवक राम जी द्वारा उनका उद्बोधन सुनने को प्राप्त हुआ । जिस ने गौ माता की महिमा को बताया एवं हिंदुओं को आपस में एक होने के कई विचार व्यक्त किया ।

इस कार्यक्रम में हमारे जुगल किशोर केसरवानी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर आसीन थे , कार्यक्रम केबर संयोजक सतीश यादव एवं सहसंयोजक आंचल चौधरी अध्यक्ष विष्णु प्रपन्नाचार्य एवं पांच परिवर्तन का विषय दीदी अनुपम केसरवानी में रखा । समाज के समाज सेवकों का भी सम्मान इस मंच में हुआ जिसमें मारवाड़ी महिला समाजसेवी के लिए पूनम शर्मा एवं उनकी टीम को सम्मानित किया गया ।अंतर्राष्ट्रीय सॉफ्टबॉल प्लेयर के रूप में सौरभ यादव को सम्मानित किया गया ।आकृति सुल्तानिया को मंचने पर कविता बोलने के लिए सम्मानित किया गया विकास यादव गौ सेवा , अभिषेक शर्मा रक्तदान एवं ्वार्थी थवाईत रक्तदान, आंचल चौधरी शिक्षक, जितेश जायसवाल रक्तदान आवेश गोयल शिक्षक,अमित सारथी एवं सविता सारथी , अरविंद खटकर एवं उनकी धर्मपत्नी संतोषी खटकड़ को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया । साथ में समाज सेवी दिशा यादव एवं सत्यामें कहार को भी सम्मानित किया गया । ईशान यादव व उनके पिता सतीश यादव को भी सम्मानित किया गया ।वाद यह आयोजन बस्ती क्रमांक 3 के अंतर्गत आने वाले संपूर्ण नई आबादी क्षेत्र, सारंगढ़ के वार्ड क्रमांक 4, 6 , 8 से बड़ी संख्या में हिंदू भाईबहनों की भागीदारी से संपन्न हुआ। सामाजिक समरसता महाभोज में सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव एक साथ बैठकर भोजन किये । इस दौरान एक समाज, एक संस्कृति की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई जिसने सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।

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