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सिंगारपुर (जोगिडिपा) में ₹4 लाख की लागत से बनी ‘अदृश्य’ सीसी रोड, चश्मा लगाकर ढूंढ रहे ग्रामीण!

सारंगढ़। विज्ञान और तकनीक की दुनिया में दुनिया भले चांद-मंगल पर पानी खोज रही हो, लेकिन जनपद पंचायत सारंगढ़ की ग्राम पंचायत सिंगारपुर के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उससे भी बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। आश्रित ग्राम जोगिडिपा में ऐसी चमत्कारी सीसी रोड बनाई गई है, जो केवल सरकारी फाइलों, पोर्टल के रिकॉर्ड और जिम्मेदारों की जेबों में ही नजर आती है। जमीन पर कदम रखते ही वह सीधे पाताल लोक में विलीन हो जाती है। ऑनलाइन सरकारी रिकॉर्ड छाती ठोककर कह रहा है कि 31 अगस्त 2025 को जोगिडिपा में सीसी रोड के नाम पर पूरे ₹4 लाख का भुगतान ‘स्वयं के संसाधन मद’ से डकार… क्षमा करें, खर्च कर दिया गया है।
मगर बदकिस्मती देखिए कि गांव वालों की आंखों पर वह दिव्य चश्मा ही नहीं चढ़ा, जिससे यह ₹4 लाख वाली आलीशान सड़क दिखाई दे सके; उन्हें तो सिर्फ वही पुराने धूल, कीचड़ और गड्ढे नजर आ रहे हैं।
चमत्कारों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। विकास की इस अंधी आंधी में 11 सितंबर 2026 को ₹8,800 का एक और ऐतिहासिक भुगतान “साफ-सफाई और नाली स्वच्छता” के नाम पर घंटे के हिसाब से मजदूरी बांटकर कर दिया गया। ग्रामीण अब हैरान-परेशान घूम रहे हैं कि आखिर वे कौन से अदृश्य मजदूर थे, जिन्होंने इतनी सफाई कर दी कि गांव में गंदगी तो जस की तस रही, बस सरकारी खजाना पूरी तरह ‘साफ’ हो गया! न कोई मस्टररोल, न मजदूरों के नाम-पते, बस कागजी जादूगरी और डिजिटल दस्तखत का कमाल। ऐसा जान पड़ता है कि पंचायत के कर्णधारों ने गांव की तकदीर संवारने का नहीं, बल्कि खुद की तिजोरियों का ‘कायाकल्प’ करने का गुप्त संकल्प ले रखा था।
इस पूरे तिलिस्म में हमारे तकनीकी जादूगर यानी उप-अभियंता (सब-इंजीनियर) महोदय की भूमिका तो साहित्य में अमर होने लायक है। साहब ने एयरकंडीशनर वाले दफ्तर में बैठकर, शायद टेलीपैथी के जरिए हवा में ही सड़क की लंबाई-चौड़ाई नाप ली, मुन्नाभाई स्टाइल में माप पुस्तिका भर दी, मूल्यांकन कर डाला और कार्य पूर्णता का ऐसा प्रमाणपत्र थमा दिया कि ठेकेदार और जनप्रतिनिधियों की बांछें खिल गईं। इंजीनियर साहब के इस दिव्य मूल्यांकन पर यदि नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जा सकता, तो कम से कम पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 और 92 के तहत पदमुक्ति और रिकवरी का कानूनी तमगा तो जरूर पहनाया जाना चाहिए।

जिम्मेदारों से संपर्क का प्रयास, नहीं उठाया फोन

मामले में ग्राम पंचायत सिंगारपुर के सरपंच, संबंधित उप-अभियंता (इंजीनियर) एवं जनपद पंचायत सारंगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक संबंधित जिम्मेदारों द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि यदि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण और भुगतान हो चुका है, तो आखिर जमीन पर इसकी स्थिति क्या है और जिम्मेदार इस संबंध में अपना पक्ष रखने से क्यों बच रहे हैं?
अब ग्रामीण जनपद पंचायत के आला अधिकारियों से मिन्नतें कर रहे हैं कि हुजूर, फाइलों की आरती उतारना बंद कीजिए और जरा अपनी सरकारी गाड़ियों के शीशे नीचे कर जोगिडिपा की जमीनी हकीकत पर तशरीफ लाइए। कागजों पर बनी इस ‘हवाई सड़क’ और ‘काल्पनिक झाड़ू’ की हकीकत देखने के लिए किसी जांच आयोग की जरूरत नहीं, बस थोड़ी सी बची-खुची प्रशासनिक शर्म और खुले नेत्र चाहिए। देखना दिलचस्प होगा कि जिम्मेदार अब भी आंखों पर पट्टी बांधकर इस मामले पर लीपापोती करते हैं या फिर ₹4 लाख के इस कथित भुगतान की वास्तविकता की जांच कर जनता की गाढ़ी कमाई की जवाबदेही तय करते हैं।

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