केडिया परिवार के भंडारे ने पूरे किए 25 वर्ष, ,20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद

स्व. गणपत केडिया ने वर्ष 2001 में की थी सेवा की शुरुआत,
पीढ़ियों से निभ रही सेवा और समर्पण की परंपरा
सारंगढ़। सेवा, समर्पण और श्रद्धा की भावना जब परंपरा बन जाती है, तो वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाती है। कुछ ऐसी ही मिसाल सारंगढ़ के केडिया परिवार ने प्रस्तुत की है। विजया दशमी के पावन अवसर पर केडिया परिवार द्वारा आयोजित महा भंडारे ने अपने 25 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पूरी, सब्जी और खिचड़ी का महाप्रसाद ग्रहण किया । नगर में यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता, सेवा भाव व पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक बन उभरा। केडिया परिवार के इस सेवा कार्य की शुरुआत वर्ष 2001 में स्वर्गीय गणपत केडिया ने नगर पालिका चौक, जिसे वर्तमान में भारत माता चौक के नाम से जाना जाता है, से की थी। विजयादशमी के दिन रावण दहन देखने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा के उद्देश्य से उन्होंने भंडारे की परंपरा प्रारंभ की। समय के साथ इस सेवा कार्य का स्वरूप विस्तृत होता गया और आज यह एक विशाल महाभंडारे का रूप ले चुका है।
25 वर्षों की परंपरा, सेवा का वही भाव वर्षों पहले शुरू हुआ यह छोटा-सा सेवा प्रयास आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ चुका है ।
केडिया परिवार ने समय के साथ भंडारे की व्यवस्थाओं में विस्तार करते हुए भोजन की गुणवत्ता और पर्याप्त मात्रा पर विशेष ध्यान दिया। रावण दहन के पश्चात घर लौटने वाले श्रद्धालुओं, महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, युवतियों और बच्चों के लिए केडिया निवास पर पूरी, सब्जी एवं खिचड़ी के महा प्रसाद की व्यवस्था की गई। भंडारे में शामिल श्रद्धालुओं को व्यवस्थित ढंग से महाप्रसाद वितरित किया गया । आयोजन का उद्देश्य केवल भोजन कराना ही नहीं, बल्कि विजयादशमी के पावन पर्व पर सेवा और सद्भाव की भावना को मजबूत करना भी रहा ।
भव्य आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां
महाभंडारे की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि – भोजन तैयार करने से लेकर श्रद्धालुओं को परोसने तक बड़ी संख्या में महिला-पुरुष अपनी सेवाएं दे रहे थे। केडिया परिवार की महिलाओं के साथ अग्रवाल परिवार की महिलाएं भी पूरी बेलने के कार्य में जुटी रहीं। इसके अतिरिक्त लगभग 25 महिला-पुरुष पूरी बेलने के कार्य में लगे हुए थे। वहीं, 10 कढ़ाइयों में लगातार पूरी तैयार की जा रही थी।
सब्जी बनाने के लिए लगभग 20 कारीगर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। हलवाइयों की करीब 50 सदस्यीय टीम भोजन तैयार करने और व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटी हुई थी। पूरे परिसर में अलग – अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए सेवा भाव का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महा प्रसाद वितरण के लिए दो अलग – अलग पंडाल बनाए गए थे। एक पंडाल में महिलाओं को महिला सेविकाओं द्वारा भोजन परोसा जा रहा था, जबकि दूसरे पंडाल में पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पुरुष सेवक व्यवस्था संभाल रहे थे। इससे वितरण व्यवस्था व्यवस्थित बनी रही और श्रद्धालुओं को महाप्रसाद ग्रहण करने में सुविधा हुई।
पुलिस व्यवस्था रही मुस्तैद
हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। एस डी ओ पी गोविंद दीवान के निर्देशानुसार पुलिस बल मुस्तैद रहा। आयोजन स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था और भगदड़ की स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते नजर आए।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने संभाली व्यवस्था
केडिया परिवार के इस महाभंडारे में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने अपनी सहभागिता निभाई। भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल अपनी टीम के साथ आयोजन स्थल पर उपस्थित रहेओ, वहीं कांग्रेस जिला अध्यक्ष ताराचंद देवांगन भी अपनी टीम के साथ पहुंचे। विधायक श्रीमती उत्तरी गणपत जांगड़े, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सोनी अजय बंजारे तथा भाजपा मंडल अध्यक्ष निखिल केसरवानी अपनी टीम के साथ भंडारे की व्यवस्था में सहयोग करते दिखाई दिए।
इसके अतिरिक्त पूर्व अग्रसेन सेवा संघ अध्यक्ष रमेश केडिया, अग्रोहा धाम अध्यक्ष बालकिशन केडिया, सेवादल के नेता गोपाल केडिया, अग्रसेन सेवा संघ अध्यक्ष दिनेश धनानिया, दिनेश केडिया, प्रहलाद लुहारीवाला, प्रकाश गोयल और राजकुमार गोयल सहित सैकड़ों अग्रवाल समाज के युवा आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में जुटे रहे। समाज के युवाओं ने भोजन वितरण, श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने और आयोजन को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को और अधिक व्यवस्थित एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया।
स्व. गणपत केडिया की परंपरा को परिवार ने रखा जीवंत
महाभंडारे के व्यवस्थापक मनीष एवं मनोज केडिया ने बताया कि इस सेवा कार्य की शुरुआत उनके पिता स्वर्गीय गणपत केडिया ने वर्ष 2001 में नगर पालिका चौक से की थी। उस समय श्रद्धालुओं की सेवा के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया यह प्रयास आज 25 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुका है। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके पिता द्वारा स्थापित सेवा, संस्कार व समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। परिवार का प्रयास रहता है कि विजयादशमी के दिन रावण दहन देखने आने वाले अधिक से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर सकें और कोई भी व्यक्ति सेवा से वंचित न रहे।
सेवा, संस्कार एवं सामाजिक समरसता का संदेश
केडिया परिवार का यह 25 वां महा भंडारा इस बात का उदाहरण है कि – किसी नेक कार्य की शुरुआत भले ही छोटे स्तर पर हो, लेकिन निरंतरता, समर्पण और सामूहिक सहयोग से वह समाज की महत्वपूर्ण परंपरा बन सकता है। स्व. गनपत केडिया द्वारा वर्ष 2001 में प्रज्वलित की गई सेवा की यह ज्योति आज हजारों श्रद्धालुओं तक पहुंच रही है।
विजयादशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस महाभंडारे ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि – धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं की सेवा करना भी धर्म का महत्वपूर्ण स्वरूप है । केडिया परिवार की यह 25 वर्षों की यात्रा आने वाली पीढ़ियों को सेवा, सद्भाव और सामाजिक उत्तर दायित्व की प्रेरणा देती रहेगी।



