
सारंगढ़। जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है, जिससे आम मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला ग्राम जोगीडीपा की गर्भवती महिला पुष्पा चौहान से जुड़ा है, जिन्हें आवश्यक सोनोग्राफी जांच के लिए लगातार दो दिनों तक अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच की सुविधा सप्ताह में केवल तीन दिन—मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार—को ही संचालित होती है। इसी के तहत पुष्पा चौहान शनिवार को लगभग 16 किलोमीटर दूर से अस्पताल पहुंचीं, किंतु उस दिन सोनोग्राफी कक्ष बंद मिला। इसके बाद मंगलवार को पुनः वे शारीरिक पीड़ा की अवस्था में अस्पताल पहुंचीं, परंतु न तो संबंधित चिकित्सक उपस्थित थे और न ही जांच कक्ष संचालित हो रहा था।
घंटों इंतजार के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं बन सकी, तो मजबूरी में गर्भवती महिला रायगढ़ रोड स्थित एक निजी क्लिनिक की ओर रुख किया, किंतु वहां भी जांच संभव नहीं हो सकी। अंततः वे बिना उपचार के ही वापस अपने घर लौटने को विवश हो गईं।
यह घटना जिला अस्पताल में व्यवस्थागत खामियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। समाजसेवी सतीश यादव ने बताया कि यह कोई एकल मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी एक्स-रे सहित अन्य जांच सेवाओं के लिए मरीजों को इसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। अस्पताल में आवश्यक संसाधनों, नियमित सेवाओं और चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता में निरंतर कमी देखी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित चिकित्सकों की उदासीनता के कारण आमजन को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
समाजसेवी सतीश यादव ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी मरीज, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इस प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े।














