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बोर खनन पर प्रशासन की दोहरी नीति? — आम नागरिकों ने उठाए सवाल, रसूखदारों को छूट देने के आरोप

सारंगढ़ । सारंगढ़ जिले में बोर खनन को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आम नागरिकों, छोटे व्यवसायियों और खनन कार्य से जुड़े श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि हाल ही में लागू किए गए बोर खनन नियमों का पालन जमीन पर समान रूप से नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि जहां छोटे खननकर्ताओं पर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है, वहीं प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के मामले में प्रशासन की सख्ती नदारद दिखाई देती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण, भूजल सुरक्षा और अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा बोर खनन के लिए एसडीएम कार्यालय से अनुमति लेना तथा मिट्टी का सैंपल प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह नियम व्यवहार में केवल सीमित वर्ग तक ही लागू किया जा रहा है।

आरोपों के मुताबिक जिले के कुछ रसूखदारों प्रभावशाली व्यक्तियों और बड़े व्यापारिक समूहों के पास दर्जनों बोर मशीनें और परिवहन वाहन संचालित हो रहे हैं, जिनका खनन कार्य दिन-रात जारी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन गतिविधियों के दौरान न तो अनुमति संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई दिखाई दे रही है।

दूसरी ओर, छोटे वाहन मालिकों, मजदूरों और सीमित संसाधनों से काम करने वाले खननकर्ताओं को बार-बार पूछताछ, नोटिस और अनुमति प्रक्रिया की जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे कई लोगों का कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आई है।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों ने प्रशासन से पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिले में संचालित सभी बोर खनन गतिविधियों की समान रूप से जांच होनी चाहिए और नियमों का पालन सभी पर एक समान लागू किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि किसी को विशेष अनुमति या छूट दी गई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही छोटे खननकर्ताओं के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट बनाने की आवश्यकता भी बताई गई है।

नागरिकों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते इस विषय पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता है तो यह मामला जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है। ऐसे में जिले में कानून के समान और न्यायपूर्ण प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

वर्सन –
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ताराचंद देवांगन ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि -कानून और नियमों का उद्देश्य व्यवस्था और न्याय कायम करना होता है, न कि आम लोगों पर अनावश्यक दबाव बनाना। यदि जिले में बोर खनन के नियमों का पालन चुनिंदा लोगों पर ही कराया जा रहा है और प्रभावशाली लोगों को छूट मिल रही है, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच कर स्पष्ट करे कि कानून सबके लिए समान रूप से लागू हो रहा है।

पूर्व जिला पंचायत सभापति एवं वर्तमान पार्षद रेशम कुर्रे ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि -कानून का अर्थ ही यह है कि वह सब पर समान रूप से लागू हो। यदि नियम केवल कमजोर वर्ग के लिए सख्ती से लागू हों और प्रभावशाली लोग उससे बाहर दिखाई दें, तो यह व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करता है। प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कानून सबके लिए बराबर है।

स्थानीय नेता सुनील शर्मा ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि -प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है, लेकिन उतना ही आवश्यक यह भी है कि कानून का अनुपालन बिना किसी भेदभाव के हो। यदि कहीं भी नियमों के पालन में असमानता या शिकायत सामने आती है तो प्रशासन को उसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। कानून सबके लिए समान है और उसी भावना के साथ कार्रवाई होना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है।

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