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*परीक्षा के समय विशेष टीवी व मोबाइल के अधिक प्रयोग से बचें- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

**पी एम श्री आत्मानंद स्कूल में नैतिक शिक्षा पर विशेष सत्र: विद्यार्थियों को माता-पिता और शिक्षकों के सम्मान का महत्व समझाया गया**

सारंगढ़, 29 नवंबर:-
सारंगढ स्थित पी एम श्री आत्मानंद स्कूल में ब्रह्माकुमारीज़ सारंगढ़ की ओर से कक्षा 6वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक नैतिक शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसे बिलासपुर से पधारी छग योग आयोग की पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी द्वारा संबोधित किया गया। जिन्होंने विद्यार्थियों को **मूल्यों, सम्मान और पढ़ाई** के महत्व को कहानियों और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से समझाया।

दीदी ने कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों को **ध्यान मुद्रा में धरती माँ पर** बिठाकर की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इससे अच्छी अनुभूति होती है और सूर्य की ऊष्मा से *विटामिन डी* प्राप्त होता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, क्योंकि विश्व का नियंता ईश्वर हमारे साथ है तो सफलता हमारी निश्चित ही है।

पूर्व में प्राचार्या रही ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि माता पिता की आज्ञा मानते हुए उन्होंने पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया और म्यूजिक, हिंदी, पर्सनल मैनेजमेंट, वैल्यू एजुकेशन एंड स्पिरिचुअलिटी इन चार विषयों में स्नातकोत्तर (पीजी) और साथ ही बी.एड. भी किया। साथ ही अधिक बच्चों से संवाद के लिए सीमित दायरे को असीमित करने के लिए उन्होंने प्राचार्य पद का त्याग करके कई स्कूलों में बच्चों को **नैतिक शिक्षा** दी क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार है।

दीदी ने विद्यार्थियों को जीवन के लिए तीन प्रमुख बातें सिखाईं:

1. **माता-पिता का सम्मान:** उन्होंने छात्रों को अपने बड़ों का सम्मान करना सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिनके पास माता-पिता हैं, वे बहुत भाग्यवान हैं। वक्ता ने बच्चों को **ईश्वर के रूप में मात-पिता** को महसूस करने पर जोर दिया, क्योंकि उनके जैसा प्यार करने वाला इस दुनिया में कोई नहीं है। उन्होंने एक सत्य घटना साझा की, जिसमें एक आईएएस ऑफिसर बेटे ने अपनी एक-आँख वाली माँ का अपमान किया, बाद में उसे पता चला कि माँ ने बचपन में एक्सीडेंट के बाद अपनी एक आँख उसे दान कर दी थी।
2. **शिक्षकों का सम्मान:** वक्ता ने कहा कि शिक्षक हमें पढ़ाते और लिखाते हैं। उन्होंने अपनी खुद की मिसाल देते हुए कहा कि वह आज भी अपने टीचर्स के पांव छूती हैं, भले ही वह वर्तमान में ब्रह्माकुमारी के पद पर हैं।
3. **पढ़ाई पर अटेंशन:** दीदी ने कहा कि **विद्यार्थी जीवन (Student Life) सर्वश्रेष्ठ जीवन** है। उन्होंने छात्रों को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने चेताया कि धन और पद प्रतिष्ठा आवश्यक हैं, लेकिन **मूल्यों का त्याग करके** ये कोई काम के नहीं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा के समय अनावश्यक रूप से लंबी मूवी देखने से बचने के लिए कहा, जो समय खराब करती है और सिरदर्द देती है।

दीदी ने छात्रों की सुनने की क्षमता को परखा। कक्षा 12वीं की छात्रा **लवली साहू** और कक्षा 11वीं के छात्र **भरत यादव** ने मंच पर आकर माता-पिता और शिक्षकों के सम्मान के महत्व पर अपने विचार रखे और इस बात की सराहना की कि उन्हें धरती माता पर बैठने का अवसर मिला। वक्ता ने इस पर दोनों छात्रों के आत्मविश्वास की प्रशंसा की।

सत्र के अंत में, स्कूल के प्रिंसिपल एलपी पटेल ने दीदियों का धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम का समापन शांति और भारत माता की जयकारे के साथ हुआ।
इस अवसर पर स्थानीय सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी कंचन दीदी के निर्देशन में मिथलेश बहन, तमनार की कस्तूरी बहन, ईश्वरी बहन के साथ स्कूल के सभी शिक्षक एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।

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