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*मथुरा से गोकुल तक लीलाधर की लीलाएं*

गोवर्धन पर्वत उठा बृज वासियों को बचाएं

सारंगढ़ । श्री गोपाल जी मंदिर छोटे मठ में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं एकादशी व्रत उद्यापन के पंचम दिवस व्यास पीठ से भागवतचार्य बंशीधर दास मिश्रा द्वारा योगेश्वर श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की अभिव्यक्ति की । उन्होंने कहा कि – कंस के अत्याचार से बचाने हेतु जब वसुदेव जी बालकृष्ण को यमुना पार कर गोकुल लाए, तभी से उनकी बाल लीलाएँ प्रारंभ हुईं । नंद बाबा और यशोदा मैया के आँगन में कृष्ण ने बाल रूप में जन्म लेकर समस्त ब्रजवासियों के जीवन में आनंद का संचार किया । भागवताचार्य ने कहा कि – नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की ।

व्यास पीठ से भागवत भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ और राक्षसों का वध की कथा बताते हुए बंशीधर दास मिश्रा ने कहा कि – बाल्यावस्था में ही कृष्ण ने अनेक असुरों का संहार किया । पूतना नामक राक्षसी जो विषपान कराने आई थी, उसी के प्राण हर लिए । शकटासुर राक्षस को पैर के एक हल्के प्रहार से दूर भगा दिया। त्रिणावर्त नामक वायु रूपी असुर को आकाश में ही मार डाला। इन लीलाओं के माध्यम से उन्होंने संसार को यह संदेश दिया कि – यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत या जब जब होंही धर्म के हानि , बाढ़ही असुर अधम अभिमानी तब तब धरी प्रभु मनुज शरीरा हरहू कृपा निधि सज्जन पीड़ा । अर्थात परमात्मा चाहे बाल रूप में ही क्यों न हों, अन्याय और अधर्म का अंत अवश्य करते हैं ।

गोपाल जी मंदिर के महंत बंशीधर दास मिश्रा ने बाल कृष्ण के माखन चोरी और नटखट लीलाओं का वर्णन किये । ब्रज के घर-घर में माखन चुराना, गोपियों के वस्त्र चूराना , गोपियों से नटखट ठिठोलियाँ करना, माँ यशोदा से डाँट खाना – इन सब लीलाओं में कृष्ण का प्रेम और स्नेह झलकता है। ये लीलाएँ केवल बालपन की शरारतें नहीं, बल्कि भक्ति व वात्सल्य के अद्भुत उदाहरण हैं । महंत ने बताया कि – गोवर्धन धारण लीला अद्भुत अद्वितीय और अनुपम है । जब इंद्र ने ब्रज भूमि पर प्रलयंकारी वर्षा कराई, तब नन्हें कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत उठा लिया । सात दिन तक ब्रज वासियों की रक्षा की और इंद्र के अहंकार को तोड़ा । इस घटना ने सभी को यह सिखाया कि – सच्चा देव वही है जो भक्तों की रक्षा करे। बाल कृष्ण की लीलाएँ केवल चमत्कार नहीं, बल्कि प्रेम, श्रद्धा और धर्म के सजीव प्रतीक हैं। उनके प्रत्येक कर्म में करुणा, न्याय और भक्ति का सार समाहित है ।

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