श्रीमद्भागवत कथा में रुक्मणी विवाह प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने नारी शक्ति और संस्कारों के महत्व पर रखे विचार

सारंगढ़ *साल्हे :-। ग्राम पंचायत साल्हे में साहू परिवार के श्री रामधन साहू एवं मोहल्लेवासियों के सहयोग से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। कथा के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान कथा वाचिका दीदी राधे प्रिया जी ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, माताएं एवं बहनें उपस्थित रहीं और भक्तिमय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय भूषण पाण्डेय का ग्राम पंचायत की ओर से विशेष सम्मान किया गया। सम्मान के पश्चात उन्हें अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया।
अपने संबोधन में श्री पाण्डेय ने व्यासपीठ पर विराजमान कथा वाचिका दीदी राधे प्रिया जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ व्यासपीठ पर बैठकर कथा वाचक धर्म और अध्यात्म का ज्ञान प्रदान कर रहे हों, वहाँ किसी अन्य को अधिक बोलने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं एवं बहनों की उपस्थिति को देखते हुए वे केवल कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहेंगे।
उन्होंने रामायण और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक नारी के अपमान ने महाभारत जैसे भीषण युद्ध की परिस्थितियाँ उत्पन्न कीं, वहीं माता सीता के हरण की घटना रामायण में लंका युद्ध का कारण बनी। इन प्रसंगों से हमें नारी के सम्मान, उसकी गरिमा और समाज में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का संदेश मिलता है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि किसी भी घर, परिवार और समाज को सही दिशा देने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है। बच्चे के लालन-पालन, विचारों, व्यवहार और व्यक्तित्व निर्माण में माँ के संस्कारों का सबसे बड़ा योगदान होता है।
उन्होंने माताओं एवं बहनों से आग्रह किया कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार, शिक्षा और उचित मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को जैसा परिवेश और संस्कार देंगे, उनका भविष्य भी उसी दिशा में आगे बढ़ेगा। एक माँ अपने बच्चे को सही शिक्षा और संस्कार देकर आईएएस, डॉक्टर, जनप्रतिनिधि अथवा समाज का एक जिम्मेदार नागरिक बना सकती है। वहीं बच्चों पर ध्यान और मार्गदर्शन की कमी उन्हें गलत रास्तों पर भी ले जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें यह भी सिखाना जरूरी है कि कहाँ बोलना है, कितना बोलना है, किस प्रकार व्यवहार करना है और जीवन में सही-गलत का निर्णय कैसे लेना है। बच्चों के चरित्र निर्माण और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव परिवार में ही रखी जाती है।
अंत में श्री पाण्डेय ने कहा कि श्रीमद्भागवत, रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथ हमें केवल कथा श्रवण ही नहीं कराते, बल्कि जीवन जीने की कला, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक मर्यादाओं, नारी सम्मान और संस्कारों की भी शिक्षा देते हैं। हमें इन महान ग्रंथों से प्रेरणा लेकर अपने परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित एवं सशक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और आयोजन के लिए साहू परिवार एवं ग्रामवासियों के प्रयासों की सराहना की।



