*37 वर्षों की अटूट धार्मिक परंपरा, मुड़पार बड़े में श्रीमद् भागवत कथा की बह रही गंगा*

*कथा व्यास राजेश तिवारी के श्रीमुख से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की सुनाई गई कथा*
कोसीर – कोसीर उपतहसील से महज 7 किमी.दूरी पर स्थित धार्मिक नगरी मुड़पार बड़े में पिछले 37 वर्षों से निरंतर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा ने क्षेत्र में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की अनूठी मिसाल कायम की है। इस वर्ष भी श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। कथा के दौरान कथा व्यास पंडित राजेश तिवारी, कवर्धा वाले के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पावन कथा का श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक श्रवण किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म, कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की भक्ति तथा धर्म की स्थापना के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही कथा पंडाल जय श्रीकृष्ण और नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मनमोहक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ उत्साहपूर्वक जन्मोत्सव मनाया।
कथा व्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ का श्रवण नहीं, बल्कि जीवन को सदाचार, प्रेम, करुणा और भक्ति के मार्ग पर ले जाने का माध्यम है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुड़पार बड़े में 37 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा क्षेत्रवासियों की अटूट श्रद्धा और धार्मिक समर्पण का प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।



