
सारंगढ़ । रक्षाबंधन का त्योहार भाई- बहन के प्रेम, स्नेह और भावनाओं का उत्सव है। इसी भावना को नई उड़ान देते हुए बरमकेला अंतर्गत कन्या आश्रम मा. शाला झाल में छात्राएं अपने भाइयों के लिए अपने हाथों से राखियां तैयार कर रही हैं । विद्यालय परिसर इन दिनों रंग-बिरंगे धागों, सजावटी सामग्रियों और छात्राओं की रचनात्मकता से गुलजार है। छात्राएं पूरे उत्साह के साथ राखी बनाने में जुटी हैं। कोई राखी को आकर्षक रूप दे रही है तो कोई उस में अपनी भावना का रंग भर रही है। खास बात यह है कि – बाजार की तैयार राखी के बजाय बहनों के हाथों से बनी राखी अब भाइयों की कलाई पर सजेगी।
राखी बनाते समय छात्राओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। उन्हें बेसब्री से उस दिन का इंतजार है, जब वे अपने भाई की कलाई पर अपने हाथों से बनाई राखी बांधेंगी । छात्राओं के लिए यह गतिविधि महज शैक्षणिक अभ्यास नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को महसूस करने व अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने का अवसर भी बन गई है।
कन्या आश्रम झाल में इस अनूठी पहल को आगे बढ़ाने में शिक्षक सरोजनी साहू, खिरोद कुमार बरिहा, विजय साव महावीर चौहान, संजय कुमार पंडा एवं हॉस्टल अधीक्षिका खिलेश्वरी नायक की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षक और अधीक्षिका की पहल से छात्राओं को स्वयं राखी तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।यह पहल बच्चों को रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ने का संदेश भी दे रही है। कन्या आश्रम झाल की यह पहल निश्चित रूप से उन स्कूलों हेतु प्रेरणा दायक है, जहां त्योहारों को केवल कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बच्चों को उससे जोड़कर सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाता है। इस रक्षाबंधन पर जब छात्राओं के भाइयों की कलाई पर राखी सजेगी, तो उसमें सिर्फ रंग-बिरंगे धागे नहीं होंगेउसमें बहनों की मेहनत, भावनाएं और भाई के प्रति अटूट प्रेम भी बंधा होगा।कन्या आश्रम झाल की बेटियों का संदेश साफ हैराखी खरीदी नहीं, दिल से बनाई जाती है और जब बहन के हाथों से बनती है, तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।









