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रायपुर-झारसुगुड़ा नयी रेल लाइन परियोजना ठंडे बस्ते में..

रायपुर, बलौदाबाजार, सारंगढ़ होते हुए झारसुगुड़ा तक 310 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाने का निर्णय लिया गया था.
खनन, उद्योग और वाणिज्य से राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावित रायपुर-झारसुगुड़ा नयी रेलवे लाइन का काम फिलहाल ठंडे बस्ते में है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्घाटन कब होगा, इसे लेकर कोई तारीख तय नहीं है. दोनों राज्यों के लोगों में इसे लेकर नाराजगी है. विदित हो कि जल विवाद और सीमा विवाद के बावजूद ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं. दोनों राज्य उद्योग और खनन के क्षेत्र में देशभर में अहम भूमिका निभाते हैं. इसे देखते हुए केंद्र ने पीपीपी मॉडल पर रायपुर, बलोदाबाजार और सारंगगढ़ होते हुए झारसुगुड़ा तक 310 किलोमीटर लंबी नयी रेलवे लाइन निर्माण का लक्ष्य रखा था।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले इस औद्योगिक और खनन गलियारे के लिए तत्परता दिखायी. फरवरी 2015 में रेल मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ साझेदारी में इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किये थे. तत्कालीन रेल मंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की मौजूदगी में यह करार हुआ था. वित्त वर्ष 2012-13 में हुए सर्वे के अनुसार यह लाइन रायपुर से बलोदाबाजार, सारंगढ़, लारा एनटीपीसी प्रोजेक्ट होते हुए ओडिशा में प्रवेश करेगी। झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर ब्लॉक के कनकतोरा गांव से कांजीझरन, बादीमाल, भीकमपाली, पंचगांव, रेनकुली, जामगांव, गोबिंदपुर, साहूडेरा, बीजाडीही, बाघामुंडा, एमसीएल लखनपुर खनन क्षेत्र, दर्लीपाली, बेलपहाड़, चिंगिरिगुडा साइडिंग के बाद लाजकुरा रेलवे स्टेशन पर हावड़ा-मुंबई रेल लाइन से जुड़ेगी. परियोजना की अनुमानित लागत 2,160.80 करोड़ रुपये थी. छत्तीसगढ़ सरकार आधी से अधिक राशि खर्च करने को तैयार थी. रायपुर से झारसुगुड़ा तक सर्वे कार्य भी पूरा हो चुका है. इसके अलावा अंबिकापुर-बतौली-सीतापुर-पत्थल गाँव होते हुए झारसुगुड़ा तक 212 किमी लंबी दूसरी लाइन का भी सर्वे हुआ था, जिसकी लागत 2,444 करोड़ रुपये आंकी गयी थी।

2017 में लोकसभा में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ने बताया था कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सरकार से इस परियोजना के लिए 50 प्रतिशत धनराशि और निःशुल्क भूमि मांगी गयी थी. लेकिन यह उपलब्ध न होने के कारण परियोजना अटक गयी. महानदी जल विवाद के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने इसमें रुचि लेना बंद कर दिया. राज्य में सरकार बदलने के बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ी. वहीं एमसीएल ने झारसुगुड़ा से सरडेगा तक अपनी रेल लाइन बनाकर कोयला परिवहन शुरू कर दिया है. अब दोनों राज्यों के लोगों की मांग है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकारें रायपुर-बलौदाबाजार-झारसुगुड़ा रेलवे लाइन के निर्माण के लिए तुरंत पहल करें, ताकि क्षेत्र में खनन और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिल सके।

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