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*आज नारियों को समतुल्य अधिकार देने की जरूरत – ममता सिंह*

सारंगढ़ । जपं अध्यक्ष श्रीमती ममता राजीव सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कहा कि – कौन भूल सकता है माता जीजाबाई को जिनकी शिक्षा दीक्षा ने शिवाजी को महान देशभक्त एवं कुशल योद्धा बनाया । शहीद भगत सिंह की मां विद्यावती ने कहा था कि – काश मेरी कोख ने एक और भगत सिंह पैदा किया होता तो उसे भी मैं देश के लिए समर्पित कर देती । देश में रजिया सुल्तान, चांद बीबी, लक्ष्मीबाई , अहिल्याबाई , जैसी वीरांगना पैदा हुई जो नारी के अद्भुत शौर्य, वीरता, एवं समर्पण की विशाल है ।स्वतंत्रता संग्राम में एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू , विजय,लक्ष्मी पंडित एवं आजाद हिंद फौज की कैप्टन लक्ष्मी सहगल के साथ ही प्रथम आईएएस अधिकारी किरण बेदी , कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल, सिंधु, पीटी उषा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। भारतीय राजनीति में प्रतिभा पाटिल, इंदिरा गांधी, सुमित्रा महाजन, मीरा कुमार , सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी , सोनिया गांधी , द्रौपदी मुर्मू जैसी नारियों ने एवं साहित्य के क्षेत्र में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, अमृता प्रीतम एवं मृदुला गर्ग जैसी विभूतियों अपनी प्रतिभा एवं दक्षता का लोहा बनवाया है । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के नाम पर वर्ष में एक बार जरूर नारियों की प्रतिभा,पराक्रम, वीरता, शौर्य एवं महत्व को याद किया जाता है । उन्हें सम्मानित किया जाता है , नारी को जगत जननी माना जाता है , जरूरत है , उनके प्रति सच्चे मन से आदर एवं श्रद्धा का भाव रखने की तथा अपने समतुल्य अधिकार देने की ।

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