
सारंगढ़– सेवानिवृत्ति प्रधान पाठिका श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी माध्यमिक शाला सहसपुर सारंगढ़ जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ से 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत हो गई अभी अप्रैल तक पुनर्नियुक्त हो कर विद्यालय मा शा सहसपुर में अपनी सेवा दे रही हैं।
सेवानिवृत्ति के पूर्व उन्होंने अपने स्वयं के वेतन से 15 लाख रुपए विद्यालय में लगाकर स्वयं के व्यय से शाला के चारों तरफ हरे-भरे बहुत बड़े मैदान जो बंजर पड़ी हुई थी को सुंदर पुष्प वाटिका मैं बदल दिया ,विद्यालय जो खंडहर बन चुका था शासन उसकी मरम्मत के लिए कभी भी संज्ञान नहीं ले रहा थी मणिप्रभा जी शासन का मुंह देखने बगैर स्वयं शाला की गति को कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया उन्होंने वहां 2011 में पदभार प्रधान पाठक के पद पर ग्रहण करने के पश्चात शाला के चारों तरफ खंडहर इमारत के चारों आओर चबूतरा बनाकर सुंदर मजबूत आकर्षक बना दिया और शाला प्रांगण के सामने पड़ी बंजर मैदान को बहुत सुंदर पुष्प वाटिका में ही नहीं बदला बल्कि एक आकर्षक किचन गार्डन बनाकर जिसमें आम सेवा केला संतरा लीची चीकू पपीता सीताफल रामफल एप्पल बेर अमरूद शहतूत स्टार फ्रूट कटहल आदि के पर्याप्त मात्रा में पेड़ लगाए जिस की 2019 से लेकर आज पर्यंन्त न जाने कितने बैच के बच्चे इन फलों को मध्यान्ह भोजन में ग्रहण करके लाभान्वित हुए हैं उन्होंने न केवल मौसमी फल ही लगाया बल्कि मौसम के हिसाब से सब्जियों को भी तब से आज पर्यंन्त तक पत्ता गोभी, फूलगोभी ,गांठ गोभी ,शकरकंद, गाजर, चुकंदर ,मटर ,बरबट्टी टमाटर ,मिर्ची मूली, शिमला मिर्च ,भिंडी , सेम ,करेला, कुंदरू आदि सभी प्रकार के फल और सभी प्रकार की भाजियों को लगाती हैं और मध्यान्ह भोजन में पूर्णतः जैविक फल और सब्जियां बच्चों को खिलाने के लिए बनवाया जाता है जिसकी प्रशंसा जितनी की जाए कम है
मैंने शाला के बाहर ही नहीं साल के भीतर भी चारों तरफ प्रिंट रिच वातावरण बनवाया दीवारों में तरह-तरह के ज्ञानवर्धक मॉडल को चित्रकारी के द्वारा चित्रांकन किया तथा एक्वागार्ड बच्चों के माध्यम भोजन में थाली धोने के लिए नल इस प्रकार 20 नाल विद्यालय में तथा बिजली की व्यवस्था अपने स्वयं के वैसे बच्चों के लिए पंखे की व्यवस्था बच्चों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर इंग्लिश में पेयजल के लिए एक्वागार्ड और फिल्टर पुस्तकालय कॉर्नर विज्ञान लर्निंग कॉर्नर गणित लर्निंग कॉर्नर अंग्रेजी लर्निंग कॉर्नर खेल कॉर्नर तथा सुंदर ऑफिस जिसमें अवार्ड रखने के लिए अलमारी आदि स्वयं के व्यय से बनवाई किचन में डायरेक्ट नल सिंक लगाकर सुंदर आकर्षक किचन को बनवाया था तथा बालकों के लिए शौचालय जिसमें कमोड लगाया मूत्रालय लगाकर बच्चों को सुविधा दिया बच्चों के लिए बालक शौचालय की कमी होने की वजह से बालक विद्यालय के बाहर तालाब के किनारे शौंच तथा मूत्र विसर्जन के लिए जाते थे जिससे बालकों को बहुत तकलीफ होती थी उसे देखते हुए मैं मणिप्रभा त्रिपाठी ने स्वयं के व्यय से शौचालय ही बना डाला
सबसे बड़ी तारीफ की बात यह है कि सेवानिवृत होने के पश्चात भी मणिप्रभा त्रिपाठी के जज्बे में लेश मात्रा भी कमी नहीं आई है बल्कि उन्होंने अपनी संपूर्ण ऊर्जा स्कूल के सौंदर्यीकरण में लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है आज वह बच्चों को अंग्रेजी विषय पढ़ाती ही नहीं बल्कि उनके नैतिक मूल्यों की शिक्षा ,योग की शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियों में संगीत, निबंध, चित्रकला, गायन आदि विधाओं को सिखा कर उन बच्चों को गुणवान बना रही हैं उनके विद्यालय में बच्चे प्रार्थना बदलबदल कर लय ताल में गातें हैं उपस्थिति शत प्रतिशत रहती है और पूर्ण अनुशासन से गणेश में आकर बहुत लगन से विद्यार्जन करते हैं क्योंकि बच्चों को हरा भरा सुंदर माहौल मिलता है स्कूल के आहते के अंदर प्रवेश करते ही विभिन्न फूलों की मंद मंद खुशबू मन को मंत्रमुग्ध कर देती है और सभी प्रकार के फलों और सब्जियों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है बच्चे स्वयं अपने हाथों से एक पेड़ मां के नाम लगाकर उसे सुरक्षित संरक्षित एवं संवर्धित करने का संकल्प लेते हैं उनके द्वारा लगाए हुए फलों के वृक्षों से जब फल निकलते हैं तो बच्चे बहुत प्रफुल्लित होते हैं
मणिप्रभा त्रिपाठी जी के इह जज्बे को देखते हुए हमारी संस्था ने इन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया उन्हें -ग्लोबल विभूतिअचीवर्स अवार्ड -से गुवाहाटी में सम्मानित किया किया गया
समाज को उनसे प्रेरणा लेकर सीखना चाहिए कि उम्र सिर्फ एक नंबर है असल तो आंतरिक इच्छा शक्ति और मजबूत इरादों का होना हम सब के लिए आवश्यक है संस्था उनके इस जज्बे को सलाम करती है ।














