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*“गीता हिंसा नहीं, विकारों पर विजय की शिक्षा देती है” – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

ब्रह्मा कुमारीज प्रभु पसंद भवन में श्रीमद् भागवत गीता की राह, वाह जिंदगी वाह का दूसरा दिन

ब्रह्माकुमारीज़, फुलझरियापारा, सारंगढ़, 29 नवंबर 2025 :-
ब्रह्मा कुमारीज सारंगढ़ में गीता ज्ञान पर विशेष सत्र चल रहा है।ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने दूसरे दिन के सत्र में कहा कि गीता का संदेश युद्ध या हिंसा नहीं, बल्कि **आत्मा की उन्नति और विकारों पर विजय** है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियाँ महाभारत जैसी हैं, जहाँ तनाव, संघर्ष और विनाशकारी स्थितियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में गीता का ज्ञान जीवन को स्थिरता और शक्ति प्रदान करता है।

दीदी ने बताया कि गीता मनुष्य को **काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और विशेष रूप से आलस्य** को जीतने की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि यह *अहिंसक युद्ध* है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं के भीतर मौजूद नकारात्मकताओं को समाप्त करता है।

सत्र में गीता के 18 अध्यायों का संक्षिप्त सार भी बताया गया—
**पहला अध्याय** मानव की समस्याओं का वर्णन करता है,
जबकि **दूसरा अध्याय** उनके समाधान प्रस्तुत करता है।
आगे के अध्याय इन समाधानों का विस्तार हैं।

दीदी ने आत्मा की अमरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मा नित्य, अविनाशी और शाश्वत है, जबकि शरीर एक वस्त्र के समान है। यही ज्ञान मनुष्य को शोक, भय और तनाव से मुक्त करता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गीता में *भगवानुवाच* आया है, जो दर्शाता है कि गीता ज्ञान-दाता देहरहित, ज्योतिर्मय परमात्मा हैं जो साकारी तन में अवतरित होकर संसार को यह अमूल्य ज्ञान देते हैं। यह संसार आज वास्तविक **कुरुक्षेत्र** बन चुका है, जहाँ हर व्यक्ति अपने ही विकारों से संघर्ष कर रहा है।

दीदी ने कहा कि गीता विशेष रूप से **गृहस्थ जीवन** के लिए उपयुक्त ग्रंथ है, जो मन को परमात्मा में लगाने और क्रोध-ईर्ष्या जैसे भावों को शांत करने की राह दिखाती है।

अंत में उन्होंने कहा कि कलियुग के पश्चात सतयुग अवश्य आएगा और उसके लिए आवश्यक है कि हम गीता के ज्ञान से स्वयं को **तमोप्रधान से सतोप्रधान** बनाएं।

स्थानीय सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी कंचन दीदी ने सभी से अनुरोध किया है कि इस अनुपम अद्वितीय अवसर का सभी नगरवासी अवश्य लाभ लें।

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