स्वास्थ्य

एडीज मच्छर एवं उसके द्वारा फैलाए गए रोग

सारंगढ़ – बारिश के मौसम आते ही मच्छरों के कारण होने वाले रोग देखने ,सुनने में आते है , कई शहरों में इसके प्रकरण समाचार पत्रों में आते रहता है और कई बार यह जान लेवा साबित होता है जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ में भले ही इसके प्रकरण देखने में नही मिल रहा लेकिन हमारे ग्रामीण अंचल के लोग जो शहरों में कामकाज के लिए या नौकरी पेशा के लिए या फिर विद्याध्ययन हेतु शहरों में रहते है और मच्छर काटने से होने वाले एक बीमारी जिसे डेंगू रोग कहते है होता है, जो एडीज मच्छर के काटने से होता है ।

डेंगू रोग मुख्यत एडीज मच्छर के काटने से होता है एडीज मच्छर के काटने से जीका ,चिकनगुनिया भी होता है। कारक तत्व वास्तव में डेंगू की बीमारी एक वायरस के कारण होता है एडीज मच्छर तो इसके वाहक है इसी कारण तो इस नेशनल सेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत रखा गया है । इस वायरस के 4 प्रकार है जिसे DENV 1 ,DENV 2 ,DENV 3 और DENV 4 के नाम से जाना जाता है । एडीज मच्छर भी अन्य प्रकार के मच्छरों की तरह होता है लेकिन इनकी प्रजाति , आदत व्यवहार में कुछ न कुछ भिन्नता होती है । आइए जाने इनकी भी 4 अवस्थाएं होती है जिसे अंडा , लार्वा ,पूपा और एडल्ट मच्छर के रूप में जानते है । एडीज मच्छर स्वच्छ पानी में ही अंडे देते है ये मच्छर छोटा होता है, गहरे रंग का होता है, टांगे ज्यादा खुली हुई नही होती, इसी कारण यह ज्यादा उड़ नही पाता ,ज्यादा ऊंचाई में नही उड़ पाने के कारण यह शरीर के उस भाग को काटता है जो नीचे होता है । जैसे पैर और हाथ काटने का समय एडीज मच्छर जो डेंगू रोग देता है वास्तव में मादा एडीज ही डेंगू फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है ।

मादा एडीज मच्छर एक डेंगू पीड़ित व्यक्ति को काटता है , उसी समय खून के साथ डेंगू के लिए कारक तत्व वायरस भी चला जाता है । जब यही मादा एडीज मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति के खून में चला जाता है । कुछ ही दिनों में इसका विकास होता है,एडीज मच्छर की आयु एडीज मच्छर की आयु भी अन्य मच्छरों की तरह बहुत कम ही होती है ।पुरुष एडीज मच्छर 10 दिनो तक ही जिंदा रहता है जबकि मादा एडीज मच्छर पुरुष की तुलना में ज्यादा जिंदा रहती है । इसकी अधिकतम आयु 6 से 8 सप्ताह होती है पर औसत रूप से यह 3 से 4 सप्ताह में ही मर जाती है।

एडीज के मच्छर साफ ,रुका हुआ पानी में अंडा देती है ।मादा एडीज मच्छर एक बार में 300 तक अंडा देती है ।साबुन पानी की सतह में यह मच्छर बैठते ही डूब कर मर जाती है , 2 से 7 दिनो तक पानी में रहता है फिर अगली अवस्था लार्वा में बदलता है अंडे देने की उपयुक्त स्थान मादा एडीज मच्छर अंडे देने के लिए कूलर के पानी जब कूलर बंद हो ,मिट्टी के बर्तन फेके गए कंटेनर ,टायर , बरसाती ठहरे हुए पानी ,पानी की टंकी जिस पर पानी जमा हो और ढक्कन खुला हुआ हो । एडीज मच्छर न पनपे इनसे बचने नियमित सफाई साप्ताहिक बेसिस पे होते रहना चाहिए या फिर जला हुआ ऑयल या मिट्टी तेल सप्ताह में डाला जाएं , घरों के आसपास पानी जमा न होने दे।

डेंगू रोग के लक्षण एक संक्रमित व्यक्ति के खून पीने के बाद जब मादा एडीज मच्छर किसी दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब संक्रमित खून के साथ वायरस उसके शहरी में प्रवेश कर जाता है और डेंगू के बीमारी की लक्षण आने में 3 से 5 दिन का समय लगजाता है । इस समय कोई लक्षण नहीं आता उसके बाद ही डेंगू के लक्षण दिखाई देता हैकभी कभी डेंगू बिना लक्षण के भी हो जाता है । डेंगू के लक्षण तेज बुखार का होना, आम तौर पर बुखार 104 फैरेहाइट से ज्यादा होता है ,सिर में दर्द जोड़ो में दर्द ,मांस पेशियों में दर्द ,आंख के पीछे अत्यधिक दर्द होना ,जी मिचलाना उल्टी का होना ,भूख में कमी, कम जोरी चक्कर का होना हाथ पैर में खून के चकत्ते का होना।

टेस्ट डेंगू की जांच हमेशा चिन्हांकित मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में होनी चाहिए डेंगू रोग एक नोटिफाइड डिजीज है इस कारण इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने के पहले शासकीय संस्था को सूचित करें आवश्यकता पड़ने पर दुबारा जांच कर सकती है इसकी जांच की रैपिड टेस्ट किट से करते है कन्फोर्मेटिव टेस्ट एलिसा टेस्ट होती की जानी होती है ।खान पान डेंगू पीड़ित व्यक्ति मे भुख कम लगाने के कारण पसीना आने के कारण ,निर्जलीकरण होता है चुकी यह ब्लड हेमरेजिक होने के कारण खून कम होता है साथ ही प्लेटलेट्स भीं कम होने लगता है इससेमरीज को ज्यादा से ज्यादा पानी एवम तरल पदार्थ की जरूरत होती है । नारियल पानी , शिकंजी आदि पर्याप्त मात्रा में लेते रहना चाहिए ,जब मरीज डेंगू बेहोशी की स्थिति में होता है तब यह जटिल हो जाता है । स्थिति में अच्छे चिकित्सक एवं सुविधा पूर्ण अस्पताल में शिफ्ट कराने होते है डेंगू पीड़ित को पपीता , केला , चुकंदर के जूस लाभ होते है , क्योंकि इसमें प्लेटलेट्स को बढ़ाने की औषधीय गुण होते है ।

उपचार डेंगू पीड़ित मरीज की उपचार के लिए इसे हल्के में नही लेना चाहिए। जरूरत से ज्यादा डरने की आवश्यकता नही होनी चाहिए सतर्क रहने की जरूरत है। जांच कराते रहने है । स्थिति के अनुरूप जरूरत पड़ने पर अच्छे अस्पताल में शिफ्ट किया जायें डेंगू से बचने के उपाय बीमारी की उपचार से ज्यादा कारगर तरीके इनसे बचने के उपाय होते है बीमारी न हो इसके लिए मादा एडीज मच्छर नही होने चाहिए , एडीज मच्छर न पनपे इसके लिए पानी जमा न होने दे घर के आसपास ,यदि पानी जमा हो तो उसमे जला हुआ ऑयल या मिट्टी का तेल डाल दे ,ऐसे कोई सामग्रियों का संग्रहण घर में न करे जिसमे पानी जमा हो जाए जैसे टूटी हुई मिट्टी के बर्तन , टायर , पानी की टंकी ,या कोई भी घर के खिड़की ,दरवाजे में जाली लगवाए ,अन्य मच्छर रोधी औषधि का उपयोग करे क्वायल ,आदि का प्रयोग कर सकते है घर में पुदीना लौंग तुलसी ,देवदार ,नीलगिरी ,लेमन ग्रास ,मेहंदी आदि की सुगंध में एडीज नही रहते है इन औषधीय पौधों के सुगंध पसंद नही है कपूर के सुगंध भी एडीज मच्छर को पसंद नही है इस कारण सभी घरों में इन औषधीय पौधों को घर में लगाए । यह जानकारी डॉक्टर एफआर निराला सी एमएचओ सारंगढ़ बिलाईगढ़ द्वारा दी गई है ।

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