
सारंगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर सारंगढ़ में ऐतिहासिक पद संचलन का आयोजन किया गया। नगर की गलियां भगवा रंग से सराबोर दिखीं हर मोड़ पर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंजते रहे।यह संचलन केवल शोभायात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और राष्ट्र भावना का जीवंत प्रदर्शन बन गया । दोपहर 2 बजे शिशु मंदिर से संचलन का शुभारंभ हुआ। सैकड़ों स्वयंसेवक पूर्ण गण वेश में, लाठी हाथ में लिएअनुशासन बद्ध पंक्तियों में निकले। संचलन शहर के दुर्गा मंदिर, मछली पसरा गली, कलेक्टर चौक, भारत माता चौक, आज़ाद चौक, अग्रसेन चौक, सदर बाजार, नंदा चौक, कचहरी चौक, देवघाट चौक, सम्राट चौक, छोटे मठ, बड़े मठ और राजा पारा होकर गुजरा। संचलन का समापन अटल परिषद में हुआ, जहां बौद्धिक सत्र आयोजित किया गया।
जैसे-जैसे स्वयंसेवक आगे बढ़ते गए, नागरिकों ने घरों की छतों से पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए । बाजारों में दुकानदारों ने संघ गीत बजा माहौल को और भी जोशीला बना दिया । सदर बाजार से सम्राट चौक तक रास्ता भगवा ध्वज से सजा नजर आया। ऐसा अनुशासन और एकरूपता पहले कभी नहीं देखी। आज गर्व महसूस हो रहा है कि – हम सारंगढ़ में हैं। प्रचारक डॉ. राजकुमार भारद्वाज ने कहा – संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का समय है। संघ की सौ वर्ष की यात्रा सेवा, संस्कार और संगठन की मिसाल है। यह संचलन राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा है । इस अवसर पर नगर संचालक जुगल किशोर केशरवानी , कौशल किशोर बेहार, संजय भूषण पांडे, हेमचंद साहू, वीरेंद्र देही, मोहित भोई, जितेश जायसवाल , सतीश यादव,अमित तिवारी, जितेंद्र गुप्ता, दुर्गा सिंह ठाकुर, राजीव सिंह ठाकुर , संगीत सिंह ठाकुर, देव आदित्य, गोपेश द्विवेदी, तुषार तिवारी, चिराग साहू, डॉ. आनंद प्रधान, अमित कुमार सारथी, आशीष केशवानी, अमित तिवारी, मयूरेश बानी सूरज गुप्ता, दिलीप साहू और अविनाश चौहान उपस्थित रहे । सभी ने स्वयं सेवकों को राष्ट्रसेवा की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।
तेज धूप , गर्मी के बावजूद स्वयंसेवक पूरे जोश और समर्पण के साथ संचलन में डटे रहे। हर कदम पर एक रूपता, अनुशासन झलक रहा था। घोषवाक्य राष्ट्र ही देवता है और सेवा ही साधना है से पूरा नगर देशभक्ति से ओतप्रोत दिखा। संचलन का समापन अटल परिषद पहुंच कर हुआ, जहां स्वयंसेवकों ने वंदे मातरम् और संघ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन किया। सभा स्थल पर उपस्थित नागरिक भी भावुक होकर उद्घोष में शामिल हो गए। नागरिकों ने कहा कि संघ का यह संचलन अनुशासन, एकता, संगठन की अद्भुत झलक था 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा नागपुर में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने सौ वर्षों में सेवा, शिक्षा, समाज जागरण की मिसाल कायम की है। सारंगढ़ में निकला यह पद संचलन सौ वर्षीय परंपरा का प्रतीक बन गया। हर स्वयं सेवक के कदम में था अनुशासन, हर मुख से गूंज रहा था राष्ट्रभक्ति का स्वर।














