छत्तीसगढ़सारंगढ़-बिलाईगढ़

छेरछेरा पर सतीश ने बांटे भोजन पैकेट व गर्म कपड़े

सारंगढ़ । छत्तीसगढ़ी की अर्थ व्यवस्था कृषि के धुरी पर घूमती है । यहाँ आज भी 80% से अधिक परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर करती है। दिन रात कार्यरत रह कर, चराचर के समस्त जीवों को जीवनदान देने वाला किसान मौन साधक होते है। अनेक जोखिमों के बाद जब फसल काट कर अपने कोठे में लाता है तो राहत की साँस लेता है। धान को बोने से लेकर उसकी कटाई और मिंजाई तक उसकी फसल को पशु, पक्षी चूहे, चोर और कीट पतंग देखे मन देखे खाते रहते हैं। फिर भी किसान को परम संतुष्टि का अनुभव तब होता है जब वह समारोह पूर्वक अपनी फसल के कुछ अंश का दान करता है। स्वेच्छा से धान की फसल के अंशदान के महायज्ञ छेरछेरा कहलाता हैं । अन्नदान का यह महायज्ञ पौष पूर्णिमा के दिन समारोह पूर्वक होता है । सतीश यादव के द्वारा असहाय लोगों को भोजन का पैकेट और गर्म कपड़ों का वितरण किया गया ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button