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*राणी सती दादी जी का महा मंगल पाठ महमिया परिवार द्वारा*

रायगढ़ (सारंगढ़) । कलि काल अवतरित भव भय हारिणी, सर्व सुख-कारिणी, संकट विमोचनी, भक्त वत्सला, दुर्गास्वरूप राणी सतीजी की महामंगल पाठ श्रीमती रेखा पूनमचंद महमिया निवास में कलकत्ता से आए भजन सम्राट द्वारा महामंगल का पाठ का संगीतमय प्रस्तुति दिया गया । सती रानी दादी का भव्य दरबार सजा हुआ था जो दिव्य और अलौकिक दृष्टिगोचर हो रहा था । माँ श्री नारायणी सतीजी देवसर गांव के निकट १३५२ ईस्वी में सती हुई थी । माँ राणी सतीजी का आदि नाम नारायणी देवी था। तथा वे डोकवा निवासी गुरसामल की सर्वगुण सम्पन्न एक मात्र लाड़ली सुपुत्री थी। उनका विवाह हिसार निवासी बंसल गोत्री सेठ श्री जालीरामजी के जेष्ठ पुत्र तनधनदासजी के साथ हुआ था । सेठ श्री जालीरामजी हिसार राज्य के दीवान थे तथा उस राज्य के नवाब झड़चन्द से उनकी घनिष्ठ मित्रता थी।

श्री तनधनदासजी के पास एक बहुत ही सुन्दर, सुडौल तथा सुलक्षणी घोड़ी थी। जिसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। उस घोड़ी के चलते सेठ जालीरामजी को रातो-रात हिसार छोड़ झुंझंनू जा बसे । नवाब झड़ चन्द तनधनदासजी से बदला लेने की ताक में रहने लगा। और जब उसे तनधन दास के मुकलावे की खबर मिली तो, उसने मुकलावा कर पत्नी सहित लौटते हुए तनधनदासजी पर जंगल में अपनी सेना सहित आक्रमण कर दिया। तनधनदासजी ने वीरता एवं शौर्य से दुश्मनों का मुकाबला कर वीरगति को प्राप्त हुये। अपने पति की वीरगति देख नारायणी देवी ने रणचण्डी का प्रचण्ड रूप धारण किया दुश्मनों का संहार करना शुरू की । उनकी अवलौकिक शक्ति एवं दिव्य रूप को देख बच रहे सैनिक भी भाग खड़े हुए यहां सती रानी दादी सती हुई और इनका भस्म झुंझुनूं पहुंची जहां भव्य व विशाल मंदिर बना ।

महामंगल पाठ को लेकर आचार्य पंडित भारत भूषण शास्त्री ने उसके महत्व को बताते हुए कहा कि – राणी सती दादी जी का मंगल पाठ अत्यंत पवित्र, शक्ति दायक और कल्याणकारी माना जाता है। इसे घर परिवार की खुशहाली, सौभाग्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए किया जाता है । मंगल पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। दादीजी की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में शांति सौहार्द बढ़ता है। मन में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण की भावना प्रबल होती है। पारिवारिक कलह, तनाव एवं मानसिक अशांति दूर कर मंगलमय वातावरण बनाती है । परिवार को एकजुट करता है, सभी को दादीजी के आशीर्वाद के साथ जोड़ता है। संतान, दांपत्य जीवन और कारोबार में सिद्धि एवं सफलता प्रदान करता है। समाज में सद्भाव, सहयोग , संस्कारों को मजबूत करता है। मंगल पाठ सुनने से पापों का क्षय, मन की शुद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। दादीजी की कृपा से कठिन परिस्थितियों में रक्षा और कार्यों में सहज सिद्धि प्राप्त होती है। जीवन में मंगल, सुख, समृद्धि और उन्नति का द्वार खुलता है।

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